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शिशॠकी कितनी बार मालिश करनी चाहि�
बहà¥à¤¤ सी मांà¤à¤‚ शिशॠकी रोजाना मालिश करना पसंद करती हैं। कà¥à¤› नहलाने से ठीक पहले मालिश करती हैं, वहीं कà¥à¤› अनà¥à¤¯ शिशॠको नहलाने के बाद उसकी मालिश करना पसंद करती हैं। कà¥à¤› परिवारों में शिशॠके पहले तीन महीनों में दिन में दो बार मालिश की जाती है। मगर, शिशॠकी मालिश कितनी बार की जानी चाहिà¤, इसकी कोई आदरà¥à¤¶ संखà¥à¤¯à¤¾ नहीं है।
मालिश कितनी बार की जाà¤, यह इस बात पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है कि आपके पास कितना समय है और शिशॠमालिश का कितना आनंद ले रहा है। अगर आप दफà¥à¤¤à¤° जाती हैं, तो आपके लिठशिशॠकी रोजाना मालिश करना थोड़ा मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है।
अगर, आप शिशॠकी मालिश कà¤à¥€-कà¤à¤¾à¤° ही कर पाती हैं, तो à¤à¥€ उसे मालिश के फायदे मिलेंगे।
शिशॠकी मालिश कितनी देर तक करनी चाहि�
आपके शिशॠके बड़े होने के साथ-साथ मालिश के समय में à¤à¥€ बदलाव आता जाà¤à¤—ा। कà¥à¤› शिशà¥à¤“ं को शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से ही मालिश करवाना पसंद आता है, à¤à¤¸à¥‡ में आप शिशॠके पूरे शरीर की मालिश अचà¥à¤›à¥€ तरह कर सकती हैं। इसमें करीब 20 मिनट से आधे घंटे का समय लग सकता है।
अगर, आपके शिशॠको शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में मालिश करवाना पसंद नहीं आता, तो आप थोड़ी देर ही उसकी मालिश करें। à¤à¤• बार जब शिशॠघà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के बल या फिर खड़े होकर चलने लगता है, तो हो सकता है वह इतने लंबे समय तक लेटना न चाहे। à¤à¤¸à¥‡ में पांच से 10 मिनट की मालिश काफी होगी।
मालिश के दौरान शिशॠके संकेतों को पहचानना à¤à¥€ मालिश का à¤à¤• जरà¥à¤°à¥€ पहलू है। आपका शिशॠसंकेतों के जरिये बता देगा कि मालिश कब बंद करती है और आपका किस तरह हाथ फेरना उसे अचà¥à¤›à¤¾ लग रहा है और किस तरह नहीं। यदि शिशॠमालिश के दौरान रोने लग जाà¤, तो वह आपको बता रहा है कि अब वह और मालिश करवाना नहीं चाहता।
अगर आप मालिश के बाद शिशॠको नहलाना चाहती हैं, तो उस समय की à¤à¥€ गिनती करें। आप नहीं चाहेंगी कि आपका शिशॠनहाने से पहले ही बहà¥à¤¤ à¤à¥‚खा हो जाठया थक जाà¤, वरना उसको नहलाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है।
शिशॠकी मालिश करने के लिठसबसे बेहतर समय कà¥à¤¯à¤¾ है?
पारंपरिक तौर पर शिशà¥à¤“ं की मालिश उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नहलाने से ठीक पहले की जाती है, और यह आमतौर पर सà¥à¤¬à¤¹ के समय ही होता है। हालांकि, आप शिशॠकी मालिश दिन में किसी à¤à¥€ समय कर सकती हैं, जब वह à¤à¥‚खा या थका हà¥à¤† न हो। इस तरह वह मालिश का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आनंद ले सकेगा।
आप उसकी मालिश और नहाने के समय के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उसके सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨, सोने और जगने की दैनिक दिनचरà¥à¤¯à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ कर सकती हैं। महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ यह है कि पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ वही चीजें, उसी कà¥à¤°à¤® में और दिन के उसी समय की जाà¤à¤‚, जैसे वे रोजाना की जाती हैं।
शिशà¥à¤“ं को पूरà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ चीजें पसंद आती हैं, इसलिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ समान चीजें, समान कà¥à¤°à¤® में करें। इससे शिशॠअधिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ व खà¥à¤¶à¥€ महसूस करते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आप पहले मालिश करती हैं, इसके बाद शिशॠको नहलाती है, फिर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाकर अंत में उसे सà¥à¤²à¤¾ देती हैं, तो आपका शिशॠà¤à¥€ इस दिनचरà¥à¤¯à¤¾ को समठजाà¤à¤—ा और रोजना उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ चीजों की उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करेगा।
हालांकि, नवजात शिशॠके साथ इतनी लंबी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अपनाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जलà¥à¤¦à¥€ ही दोबारा à¤à¥‚ख लग सकती है, या थकान महसूस हो सकती है। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में नवजात शिशॠकी मालिश और नहाने का समय कम रखें। शिशॠजब बड़ा होने लगता है और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय जगा रहने लगे, तब आप इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का पालन करने के लिठपूरा समय ले सकती हैं।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मालिश शिशॠको आराम देती है, इसलिठआप मालिश को रात को सोने के समय की दिनचरà¥à¤¯à¤¾ का हिसà¥à¤¸à¤¾ à¤à¥€ बना सकती हैं। सोने से पहले शिशॠकी मालिश दिन à¤à¤° की उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ के बाद उसे तनावमà¥à¤•à¥à¤¤ और शांत करने और सोने के लिठतैयार करने में मदद करती है।
अगर, आपका शिशॠरात में काफी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रोता है, तो शाम को मालिश करने से इसमें कमी आ सकती है। मगर, आमतौर पर शिशॠजब रोना शà¥à¤°à¥ करने वाला हो, उससे पहले ही उसकी मालिश शà¥à¤°à¥ कर दें।
धीरे-धीरे जब आप शिशॠके सोने, जगने और रोने के समय को बेहतर समà¤à¤¨à¥‡ लगेंगी, तो आप उसकी मालिश और नहलाने के लिठउचित समय à¤à¥€ ढूढ़ पाà¤à¤‚गी। इस मामले में शिशॠके संकेतों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° चलें।
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